Emotional Pulse

Spiritual feel of pulse

NOTE: The wave length of Emotional feel of pulse messages are based on the interactive exchange. These emotional feel of pulse of wave length messages are based on interactive exchange with emotions when soul and Divine are  hyperlinked while moving or walking  with open  mind anywhere. This could vary on the state of mind Giver and receiver

नोटःकभी कभी सैर करते हुए, सफर करते हुए या भजन संध्‍या मे लीन होने पर मन की भावनाओं की तरंगों के माध्‍यम से प्रभु की नज़दीकियां इतनी बढ़ जाती हैं कि प्रभु से अन्‍तरमन संवाद अपने आप स्‍थापित हो जाता है। संवाद और संदेशों की माला परो कर साध संगत को अर्पित है।

भावनात्‍मक संदेश 1

प्रभु आमने सामने दिखाई क्‍यों नहीं देता ?  प्रभु मानव से छिपा क्‍यों रहता है फिर भी  हमारे अन्‍दर आत्‍मा के रूप में रहते हुए भी हमे दिखाई  नहीं देता  ।  प्रभु का स्‍वरूप तो मान्‍यता के अनुसार दिखाई देता है। प्रभु का रूप आत्‍मा की तरह है । आत्‍मा जिस तरह हमारे अन्‍दर रहते हुए भी हमे दिखाई नहीं  देती । जब आत्‍मा शरीर छोड कर जाती है तो हम आत्‍मा की उपस्‍थती का आभास कर पाते है । इसी प्रकार हवा के झोको का एहसास हम कर सकते है पर आँखों से देख नहीं  पाते। ऐसे ही हम प्रभु को आमने सामने नहीं देख पाते । परन्‍तु करोंड़ो में विरले विरले प्रभु को सीधे मिल पाते हैं। करोंड़ो में विरले ही प्रभु को साक्षत रूप में देख पाते हैं।

भावनात्‍मक संदेश 2

प्रभु ! मै तो मन की दहलीज़ पर बैठा आप की राह बटोर रहा था पर आप अचानक आये, किधर से आये,कहां से आये मुझे आहट तक भी सुनाई नही दी। मैं तो सोच रहा था कि आप के आने पर मैं अपने मन के बगीचे में सजाये तरह तरह के अनोखे  और रंग बिरंगे अनुभूति और अनुभव के फूलों से आप का स्वागत करूँगा । प्रभु ! यह फूल भिन्न भिन्न स्थानों पर, आप के आदेशानुसार,साध संगत की सेवा करते हुए मुझे   प्रसाद स्वरूप साध संगत ने दिये हैं, ये फूल  ला कर मैने इस मन के बगीचे में सजाये हैं और जिन्हें मैंने  आप के आशीर्वाद से सीचा है । चाहत तो बडी थी कि इन का एक गुलदस्ता आप को  स्वयं आपने हाथों से भेट करू, पर आप अचानक आये और आते ही गले लगा लिया,इतना प्‍यार किया कि मैं भाव विभोर हो गया और खुशी के स्वावतरित आँसुओं को ही पोछता रहा, पता ही नही चला ,गुलदस्ता कब भेट करू,कृपया क्षमा करो ।

भावनात्‍मक संदेश 3

साहिबे-हज़ूर !

 इस छोटे से मन  को अपने गगन का थाल बना दो

जिस में अंदर बाहर के जगमगाते दिव्‍य दीप

सुर्य, चाँद ,सितारे तथा आन्‍तरिक रूहानी जोतों जगती दिखती देती रहे ।

आप की दी हुई  दिव्‍य ज्‍योति को मैं मन की भावनाओं की तरंगो

से सचेत्त बनाये रखु

इस रूहानी भावनाओं की दिव्‍य जोत

  आप के चरणों में

सिर झुकाती नज़र आये ।

इस में अपने प्‍यार की  ऐसी महक मिला दो जो

आनन्‍दमयी चौर साध संगत को खुश करती रहे।

साध संगत पर भावनाओं के रंग-बिरंगे फूलों

की अमृतवर्षा बरसती  रहे।

इस में आप की यादों का दरियां निरन्‍तर बहता रहे

जिस में हम प्रतिदिन भावनात्‍मक स्‍नान कर आनन्‍दित होते रहे।

भावनात्‍मक संदेश4

ज्ञान= जानकारी पुस्‍तकी + गैर-पुस्‍तकी जानकारी +स्‍व-विवेक +अनुभव +अनुभूति –अहम= ज्ञान

SEGMENT 2

भावनात्‍मक संदेश 5

कभी आप  ईलाही फकीर की आँखों की ओर देखते है और आप

की आँखे दो चार होती हैं तो आप उस में कोई सन्‍देश आता हुआ महसूस करते हैं:

1 बच्‍चू ! तू किधर फिरदां है ज़रा मेरे कोल ते आ।

2 बच्‍चू ! मैं ता तेरे बगैर ओदर गया हां।

3 बच्‍चू ! अज रज रज गलवकडियां पान दा जी करदां है।

4 बच्‍चू ! कि सोचदा हैं?

भावनात्‍मक संदेश 6

साहिबे-हजूर! आप वहाँ हम यहाँ कैसे हो मिलन ?

बच्‍चू ! तुम जहाँ मैं वहाँ।

भावनात्‍मक संदेश 7

बच्‍चू ! तुझे मैंने इस दुनियाँ में नंगा धड़ंगा और खाली हाथ भेज़ा है, कोई धर्म, जाति, सम्प्रदाय व अन्य कोई चोगा नहीं पहनाया, केवल इतना ही कहा कि तुम इस दुनिया में जा कर, दुनिया के किसी भी भाग में रहते हुए उन प्रियजनों की सेवा करो जो कई कारणों से मुझ तक नहीं पहुँच पाते और जिन को मेरी सहायता की आवश्कता है, सेवा करो बिना किसी भेदभाव के, अपने पूरे सामर्थ्य, साहस एवं योग्यता के आधार पर, अपने परिवार के दायित्वों को निभाते हुए, उन का पालन करते हुए, तुम्हें जब भी इस दुनियाँ के किसी भी कोने में रहते हुए, कोई कठिनाई व बाधा आये, तुम मुझे वही से प्रार्थना के माध्यम से भावनात्मक सन्देश भेजना अथवा सम्वाद स्थापित करना, मैं सारी कठिनाईयों, बाधाओं का निवारण करुगा । तुम मुझे जब चाहो जिस रूप मे चाहो मिल सकते हो, यह मेरी गारन्टी है”

भावनात्‍मक संदेश 8

बच्‍चू ! प्रभु मानव का इलाही डाक्‍टर है।

भावनात्‍मक संदेश 9

प्रभु ! यह मेरे बस मे नही अपनी लकीरों को आप ही बदल दो ।

भावनात्‍मक संदेश 10

 रबां मेरेया ! किस तरां सुनावां इस दिले दर्द दी दास्‍तां।

भावनात्‍मक संदेश 11

बच्‍चू ! देख ते ज़रा मुझे सोने का मुकट ,सोने का हार पहना

कर मुझे प्रभावित करना चाहते हैं इन्‍हे साफ साफ बता दे,

मैं किसी मुकट, हार व किसी दान से प्रसन्‍न नहीं होता ,मुझे

वे भक्त बहुत प्रिय है जो बिना किसी बनावट के अपनी

बात भावनों के माध्‍यम से मुझ तक ले कर आते हैं और

मेरे कान में सुनाते हैं।

 

 

 

 

2 comments on “Emotional Pulse
  1. johhnyAmida says:

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